थल प्रशिक्षण
विद्यार्थियों को बैंकों से लाभ अथवा अनुदान प्राप्त करने हेतु अनुमोदित पाठ्यक्रम
इग्रुआ में प्रारंभिक स्तर से वाणिज्यिक पायलट लाइसेंस (CPL) तक का प्रशिक्षण लगभग तीन वर्षों में पूरा कराया जाता है। प्रशिक्षण के पहले 5 से 6 महीनों के दौरान प्रशिक्षु थल -आधारित प्रशिक्षण विभाग में रहते हैं। इस अवधि में उन्हें निम्नलिखित विषयों का अध्ययन कराया जाता है: • वायु मार्ग निर्धारण • विमान की रेडियो एवं उपकरण प्रणालियाँ • विमानन मौसम विज्ञान • विमान की तकनीकी जानकारी • विमानन संबंधी नियम एवं विनियम कैडेटों को राजीव गांधी राष्ट्रीय विमानन विश्वविद्यालय (RGNAU) के माध्यम से विमानन में स्नातक विज्ञान (B.Sc. Aviation) के पाठ्यक्रम के अनुसार भी शिक्षा दी जाती है। थल -आधारित प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कैडेटों को उड़ान संचालन विभाग में भेजा जाता है। वहाँ उन्हें उड़ान अनुकरण यंत्र तथा वास्तविक उड़ान का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रशिक्षण
प्रशिक्षण अत्यंत योग्य एवं समर्पित प्रशिक्षकों की एक टीम द्वारा दिया जाता है। इस टीम का नेतृत्व मुख्य थल -प्रशिक्षण अधिकारी करते हैं तथा इसमें विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक शामिल होते हैं। प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए न्यूनतम 480 घंटे का पाठ्यक्रम पूरा कराया जाता है। इसका उद्देश्य कैडेटों को थल -आधारित विषयों में वायु परिवहन पायलट लाइसेंस (ATPL) स्तर का ज्ञान प्रदान करना है। । थल प्रशिक्षण विषयों के लिए प्रशिक्षकों की टीम इस प्रकार से है -| क्र.सं | विषय | नाम | अनुभव |
|---|---|---|---|
| क. | तकनीकी सामान्य विषय | एयर कमोडोर वी. के. मिश्रा (सेवानिवृत्त) | भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी। आईआईटी खड़गपुर से एम.टेक., तथा रक्षा एवं सामरिक अध्ययन में एम.एससी. मुख्य थल -प्रशिक्षण अधिकारी |
| ख. | वैमानिकी मौसमविज्ञान | ग्रुप कैप्टन (डॉ.) संजय कुमार श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त) | पूर्व वायुसेना अधिकारी, एम एससी भौतिकी, पीएच डी, एम टेक और एम फिल |
| ग. | विमान की रेडियो एवं उपकरण प्रणालियाँ | ग्रुप कैप्टन पी. के. सिंह (सेवानिवृत्त) | प्रशिक्षित वायु-मार्ग निर्धारण प्रशिक्षक। |
| घ. | वायु मार्ग निर्धारण | ग्रुप कैप्टन ए. के. शर्मा (सेवानिवृत्त) | प्रशिक्षित वायु-मार्ग निर्धारण प्रशिक्षक। |
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पृष्ठ अंतिम अद्यतन तिथि:30-09-2026 04:27 AM

